उरी में जो हुआ वो हर भारतवासी के सीने में शूल की तरह है!!!!!

उरी में जो हुआ वो हर भारतवासी के सीने में शूल की तरह है।

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 हमारे आत्म सम्मान , स्वाभिमान पर आघात है…..

हमारा गुस्सा जायज़ है…..

हमारे जवान जाएँ उन नापाक हाथों से , यह हमें किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं…

कल हमने जी भर कर गुस्सा निकाला ,हमने ज़माने भर की गालियां दीं , हमने जी भर भर कर कोसा  अच्छा है , पता चला कि हम सब भारत माँ के सपूत अपनी धरती से कितना प्रेम करते हैं।  पर ऐसा लगा जैसे सरकार विरोधी messages का व्यापार ही चल पड़ा हो।
                                                                     बाज़ार गर्म था , देश प्रेम बिक रहा था , उसे भरपूर बेचा गया सोचियेगा ज़रूर ……\"uri2\"
 उससे अलग विचार मंथन यदि करें तो इतनी लानत करने के बजाय
यदि ठन्डे दिमाग से सोचे तो क्या यह ज़रूरी था ? हम सरकार पर
भरोसा नहीं जताना जानते ? क्या हमें अपनी सरकार की मूलभूत नीयत
पर ही शक कर लेना चाहिए ? क्या कोई भी सरकार चाहेगी कि
वह देश की अस्मिता दांव पर लगने दे …..
पर हमने वही करा जो हमें बिलकुल नहीं करना चाहिए था। गुस्सा ज़ाहिर करने का पूरा हक़् है हमें लेकिन लानत भेजने का नहीं।      पाकिस्तान चाहता यही है कि हम तुरंत retaliate करें , counter fight करें   , हमें tight spot पर लाकर देश में सरकार की साख़ गिरे     , बलूचिस्तान का बदला तो पकिस्तान को लेना ही था।  यह बौखलाहट है। इससे फिर साबित हो गया कि पकिस्तान में नवाज़ सिर्फ नाम के वज़ीरे आज़म हैं , सरकार की नकेल तो किसी और के हाथ में है। आतंकवादियों के इस हमले से पाकिस्तान की विश्व पटल पर कितनी साख गिरी है हमने देखा है। बांग्लादेश जैसा देश पकिस्तान को आँख दिखा रहा है।
                 कल  जो reaction हम चाह रहे थे  , हम नहीं जानते कि उस समय चीन का क्या reaction होता  ?  क्या वो अपने नए buisness पार्टनर को हमसे ज़्यादा इज़्ज़त देता ? साउथ china sea के बहाने हमें धमकाने के लिए चीन को सिर्फ एक बहाना चाहिए ,  हमारे युद्ध पोत  कहाँ और कैसे तैयार होते यदि चीन , दक्षिण की तरफ से आक्रमण कर देता ? रूस , पकिस्तान के साथ सैनिक अभ्यास के बहाने , पकिस्तान में खड़ा पाया जाता  , ऐसे में,क्या हम और हमारे सैनिक अपने असले के साथ ,  तुरंत , बिना किसी strategic planning के , आक्रमण कर देते ?ब्रह्मोस हमारे पास है लेकिन क्या वो तैयार है ???
\"uri3\"
                     यदि भारत ने attack करा होता , तो वो full fleged war होती , सिर्फ आक्रमण नहीं होता , जंग के पहले की तैयारी न हो तो वो और बड़ी मूर्खता होती । चाहे वह अंतर्राष्ट्रीय साथ हो या आतंरिक तैयारी  ,असद , सैन्य बल , खाद्य , चिकित्सा , और अपार धन ….इन सब की तैयारी करे बिना युद्ध का बिगुल बजाना ज़्यादा हानिकारक होता। पकिस्तान को  छोड़ना नहीं है , बख्शना भी नहीं है पर हमारे हर जवान की क़ीमत है उसे हम यूँही तो युद्ध में नहीं धकेल सकते ?

                  Reation होना चाहिए , हर भारतीय चाहता है  , अभी सिर्फ एक ही विचार है … बदला ….. लेकिन जैसा army chief कह रहे हैं …. कि कब और कैसा वह अब हम decide करेंगे …पकिस्तान के भेजे हुए आतंकवादी नहीं!!!!!!!!!!

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