!!!!!!!! हम महान हैं। महान इंसान !!!!!!!!

कुछ  दिन  पहले उदयपुर की यात्रा करी -कार से ! कार से सफर करने में एक आनंद यह आता है   कि  कहीं  भी पोहे खाने  रुक सकते है।  और अपने देश का  भृमण भी हो जाता है।
हम शहरों में रहने वाले मिट्टी की सुगंध ,खेतो में खड़ी फसलें ,  पानी भरती महिलाएं ,  चौपाल पर बीड़ी पीते पुरुष देखकर आश्चर्य करते है। लेकिन  आजकल दृश्य कुछ बदल गया है, मोटर ,साइकिल पर  पुरुष  के पीछे ,सिलेंडर पकडे cross legged बैठी महिला  , खी -खी करते छीछोरे दिखाई देते है।  हा एक दृश्य नहीं बदला और वो है  सड़क  के बीचो-बीच बैठी  \”गौमाता \”   ।  यह है   विशुद्ध भारतीय गॉँव का मनोहारी दृश्य  ।

परन्तु कुछ तस्वीरें इस बार मन को कचोट गई ! अभी  तक उन  से उबर  नहीं पा रही हूँ !

यह धान  काटने  का समय था , सब खेतो में थ्रेशर दिखाई पड़ रहे थे !  ट्रेक्टर और थ्रेशर भारत के किसान की प्रगति की  इबारत लिख रहे थे !

वहीं  एक अड़ियल बैल हिल नहीं रहा  था ! थका था , या हठी  हो गया था , पता नहीं , पर किसान जरूर  Tension में होगा !उसे फसल काटनी होगी , बोरियों में भरनी होगी ,ट्रेक्टर में लाद कर मंडी में लाइन में लगना होगा ,दाम की भी चिंता होगी ! उस बेचारे की सारी चिंता उस बेजान जानवर पर निकल रही थी ! नुकीले हण्टर नुमा कोड़े  से उस बैल को वो मारे जा  रहा था ! बैल था , कि  हिलने  का  नाम ही  नही ले रहा था !मुझ से रहा न गया ! मै भागी  -भागी  खेत में लगभग चिल्लाते   हुये पहुँच गईं ! पास जाकर देखा तो बैल की आँखों से आंसू बह रहे थे ! उसका मोटा चमड़ा हंटर की मार से चरमरा उठा था !बेजान मूक जानवर कहने लायक  न  था ! अपनी पीड़ा कैसे बताता ?  कुछ तो कष्ट सता रहा था ! मेरे बहुत चिल्लाने के बाद ,किसान पसीजा उसने बैल का मुआयना करा ! पता चला बैल  के पंजो में कांच का टुकड़ा फँसा हुआ था ! जिससे खून  रिस रहा था ! उसे देख कर हम सब सन्न रह गए ! एक लम्बी चुप्पी के बाद किसान अपना माथा पकड़कर बैठ गया ! उस बैल  को सहलाया ! उसका बच्चा भाग कर बैल के लिए पानी लाने गया ! मेरी आँखों से भी आंसू बह रहे थे ! मेरी बेटी मुझे सहला रही थी ! शायद किसान को अपनी भूल का  एहसास हो गया था ! मैं   भी वापस अपनी कार की तरफ मुड़ गई थी !

\"farmer\"रास्ते में एक क़स्बा आया  नाम तो अब याद नही। एक ट्रॉला  आगे उलट गया था । सड़क पर एक लम्बी कतार गाड़ियों की लग गयी थी । कार में बैठे रहने से बोर होने से बचने के लिए में आगे पैदल चल पड़ी । और जो देखा तो मैं  फिर हिल गई। रेलिंग के किनारे एक गधा अधलेटी हालत में था । कराह रहा था । पता नही क्या तकलीफ रही होगी ? अजीब सी आवाज उसके मुँह  से निकल रही थी। वही पास से  कुछ मनचले बच्चे गुजरे । उन्हें रोता हुआ गधा दिख गया । ओह ! उनके लिए शायद इससे ज्यादा मनोरंजक दृश्य और कुछ नही होगा । लेटा ,बीमार ,कराहता और वो भी गधा !  एक लड़के  ने उसकी पुंछ ली और पूरी ताक़त के साथ खींच दी । गधा चिल्लाया । सब हँसे । तभी दूसरे ने टांग खींची और गधे को खींच दिया । वो और चिल्लाया । अब सब और हँसे। फिर सबने मिलकर उसे लाते मारनी शुरू कर दी । गधा चिंघाड़ रहा था ,और वो लड़के  ठहाका लगा कर हँस रहे थे। मैं  उनपर दौड़ पड़ी । मुझसे रहा न गया । अब चीखने चिल्लाने की बारी मेरी थी। मेरी आवाज सुनकर भीड़ इक्कठी हो गयी थी ।  अब \’गधा \’ मैं  थी क्योंकि अब सब मुझपर हँस रहे थे। मैं  एक गधे के लिए चीख रही थी ।  तभी एक पुलिस वाला आया और उसने मेरी मदद करी।

ये क्या हो रहा था ? ये कैसा सफर था ? लेकिन अभी सफर खत्म नही हुआ था । अंग्रेजी में कहूँ, तो सफर से suffer कर रही थी ।  उदयपुर पहुंचकर रास्ते में हुए ये  हादसे वहाँ के खुशनुमा माहौल में मैं  भूल गयी । पर लौटते हुए फिर वही रास्ता था ।

आगे एक टेम्पो जा रहा था । जिसमे मुझे ठसाठस भरी दो भैंसो का पिछवाड़ा नजर आ रहा था । सड़क सकरी थी । तो काफी देर तक वो टेम्पो हमारी गाड़ी के आगे चलता रहा । तब उसे ध्यान से देखने का मौका लगा |  तेजी से ओवर टेक कर जाते तो ध्यान भी नहीं रहता ।
टेम्पो अपनी गति से चला जा रहा था , कि सड़क पर दौड़ती हुई एक भैंस आ गयी ।  टेम्पो ने यकायक ब्रेक लगाई। वो टेम्पो में भरी हुई भैंसो का मुहँ जोर से  आगे की तरफ जाकर  टकरा गया । वो जोर से चिघाड़ना चाहती होगी  , पर उसका मुह बांधा हुआ था। ड्राइवर ने फिर ब्रेक छोड़ी और फिर झटका लगाकर  टेम्पो चल पड़ा ।  वो  बेचारी  फिर टकराई। पता नही  कहाँ जा रही  थी , क्यों  जा रही  थी , कितना लम्बा रास्ता था , और कितनी बार उनका  मुहं टूटना था ? आगे की सीट पर बैठे तीन लोग गुटखा में खाने  में ज्यादा मगन थे। शायद यही ढर्रा  है।  हैरानी की क्या  बात है ? जनावर ही तो है  ?

\"goat\"फिर  थोड़ी दूर पर एक आदमी   बकरी लिए जा  रहा था । बकरी की गर्दन से बंधी रस्सी उसकी बारीक़ मुलायम गर्दन को खींच  रही थी । बकरी का गला रुंध रहा होगा ।  वह जाना नही चाह रही थी। अजी ऐसे कैसे जाना नही चाह रही थी ?  वो होती कौन थी  न चाहने वाली ? ले जाने वाले ने उस गरीब बकरी का कान जोर  से मरोड़ा और मरोड़ के खींचता हुआ चलने लगा   ।  गर्दन का दर्द ज्यादा था या कान का पता नही। मिमियाते हुए चीखती बकरी रो रही थी। उसे नही जाना था। उसे शायद  अपनी माँ से अलग नहीं होना था |  या शायद

उसे अपना हश्र  पता था ।  पर उसकी मर्जी पूछी किसने ?

 

\"hens\"हमारे  यहाँ मटन ,चिकन के छोटे व्यापार के लिए  कोई लाइसेंस की आवश्यकता नही होती । जिसने चाहा जहाँ चाहा ,बूचड़खाना खोल लिया ।एक के ऊपर एक छोटे से गंदे से पिंजरे में बीस -बीस मुर्गियाँ भरी होती है  ।  एक कसाई बैठा होता हैं , गंदे सी मक्खियों से भरे खोमचे में और उसका खूनी व्यापार चल रहा होता है।  तभी उसे मुर्गियां  supply करने एक टेम्पो आया ।
उस टेम्पो से आदमी उतरा ,उसने चार मुर्गियां एक  हाँथ में  ली और चार  दूसरे हाँथ में , वो मुर्गियां उलटी टंगी हुई थी । फिर नजर पड़ी ,एक पूरा ढेर जिन्दा मुर्गियों का उल्टा टंगा हुआ था , पैरो से बंधा हुआ । जिन्दा थी वें। घबरा रही होगीं । खून सर को आ रहा होगा । शायद चलते टेम्पो  में उलटा  लटक कर चक्कर भी आ रहे होंगे । पर यह तो मुर्गी की नियति है । यह हमारा दोष थोड़े ही है की वो मुर्गी पैदा हो गई है । वह कौन complaint करेँगी ? किससे करेँगी ? कि मैं  उलटी लटकी हूँ, मुझे चक्कर आ रहा है।  ठीक है, काट लेना,  पर जब  तक जिन्दा  हूँ   तब  तक सम्मान से जीने का हक  तो दे दो ?
पर हम इंसान हैं । Most Superior Race !
जनावर को कैसे  Treat करा जाता है ,हमे वो हमे सिखाने की जरुरत नही है।
वो बोल नहीं  सकते ये उनकी Problem है !
उस पर लाते मारकर ,चाबुक चला कर खींच तान कर ,काट कर जुल्म करना हमारा अधिकार है क्योंकि  हम इंसान हैं।
महान इंसान !
हमें दर्द होता है ,हम कराहते हैं , चीख सकते हैं और फिर  हम दया की भीख भी मांग सकते हैं।

जानवर ,जानवर है , उसे यह सब अधिकार नहीं ।
क्योकि सिर्फ  हम महान हैं।
महान इंसान !!!!!!!
 

 

 

 

 

 

 

 

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