कुछ याद आ रहा है न ? पीपली लाईव !

पीपली लाईव .

कुछ याद आ रहा है न ? पीपली लाईव !

वहाँ नाथा था , यहाँ गजेन्द्र है !

पीपली लाईव !!!

कुछ याद आ रहा है न ?
पीपली लाईव !

वहाँ नाथा था , यहाँ गजेन्द्र है !

नाथा को उकसाया जाता है कि वो आत्महत्या कर ले, यहाँ  गजेन्द्र को उकसाया गया ! वहाँ नाथा तो बच गया पर यहाँ बेचारा गजेन्द्र बलि चढ़ गया !

Political drama खेलते – खेलते अबकि बार आम आदमी पार्टी ने अपने ही हाथ जला लिए ! यह मदारीपना अरविंद केजरीवाल एण्ड कंपनी शुरू से ही खेलती आ रही है ! लेकिन नौटंकी की भी एक सीमा होती है ! केजरीवाल भूल गए पटाक्षेप  कब करना है !

   “अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत !\”

अब गलती मान  लें, रों लें , विलाप कर लें पर गजेन्द्र तो वापस नहीं आएगा .

विलाप आप गजेन्द्र पर नहीं बल्कि अपनी कूटनीति की विफलता पर ,अपने मोहरे पिटने पर, अपनी छवि तार – तार होने पर कर रहे हैं !

और फिर सीना जोरी यह की  अब आप दोष मीडिया पर मढ़ रहे हैं कि T.V. Channels अपनी TRP बढ़ाने के लिए बार – बार गजेन्द्र की कहानी बता रहे हैं !

महान मुख्यमंत्री जी , TRP बढ़ाने के लिए तो क्या आपने ये  घिनौनी साजिश रची  थी !                \"Kejriwal_1225350f\" \"47047305\"

गजेन्द्र न गरीब था ,न किसान ! हाथ के हुनर वाला व्यक्ति था ! मेहनतकश व्यक्ति था , कुछ कर

गुजरने की ख्वाहिश वाला व्यक्ति था , और आपने इन गुणों का फायदा उठाया ?

पिछले हफ्ते मैंने राहुल गांधी को किसान रैली पर किसानों को हिमायती होने पर Question उठाया था !

किसान किसी भी एक की चिंता का विषय नहीं हैं , वह सिर्फ ज़रिया है — वोटों का !

धिक्कार है ! बस करो ऐसी  राजनीति !

कभी तो सिर्फ देश की सोच लो !

कभी तो नंगी राजनीति और कुर्सी की लालसा से ऊपर उठ जाओ !

कुछ विषयों पर तो एक हो जाओ ,तो देश एक हो जाएगा !

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