ललितमोदी ने सारा मीडिया चुंबक की तरह अपनी ओर खींच लिया

ललितमोदी ने सारा मीडिया चुंबक की तरह अपनी ओर खींच लिया है ! बेचारे अरनब गोस्वामी  का चीख – चीख कर गला बैठने को आ रहा है, कभी डिग्री काण्ड , कभी ललित काण्ड, कभी पंकजा काण्ड , पर इतने सब में  घुन की तरह पीस जाती हैं , वो छोटी खबरें जिनकी और भी ध्यान जाता तो मीडिया  चिल्लाने से मुजरिम पकड़ा जाता और शायद न्याय का रास्ता खुल जाता। घटना छोटी है, इसलिए कि  हम ऐसी घटनाओं के आदि हो चुके हैं , अब हमारे खून में उबाल आना बंद हो गया है, सही भी है कब तक आएगा ? उबाल एक बार आता है पर यहाँ तो रोज का ही मामला है। बड़ी घटना सिर्फ इसलिए कि हमारे यहाँ खेल सिर्फ क्रिकेट है , क्रिकेट खिलाडी भगवान या साक्षात् अवतार, बाकी सारे खेल टाइम पास और खिलाडी इस लायक नहीं कि उन्हें तवज्जो भी दी जाए। फिर उस खिलाडी का गुनाह कि उसने खेल ऐसा चुना।  मैं  बात कर रही हूँ , डॉली सिंह कि, जो कानपुर से है। ये कबड्डी की खिलाडी है। पिछले दिनों कुछ लड़के इनके घर में जबरदस्ती घुस गए , इन्हें वहीं घर वालों सामने घसीटा, बेरहमी से मारा और धमकाया इनका अपराध यह था, कि डॉली ने पहले इन लड़कों का विरोध करा था। यह मनचले आज के आवारा नशे में धुत लड़के छेड़ – छाड़  थे, डॉली के विरोध करने पर , इनके पुरुष अहं को बेहद ठेष पहुँची और वे बदला लेने के लिए डॉली के घर के अंदर तक घुस गए।

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काहे का नारी सम्मान , काहे की पूजा ? यह सब किताबी बातें फलसफों में ही अच्छी लगती हैं।  सड़क पर नहीं।  छेड़ ही तो रहे थे , तो छिड़ जाती।  विरोध क्यों करा ? कौन ऐसी स्टार खेल की स्टार खिलाडी हो गई थी।  इस देश में एक ही खेल महान है बाकी खिलाडी नाली के कीड़े।  उनमें खुद दम हो तो आगे बढ़ जाऐं।  सारा  Sponsor  का पैसा तो पहले  से ही करोड़ों कमाने वाले ये  क्रिकेट खिलाडी हजम  जाते हैं। बाकी खिलाडियों की न इज्जत है , न खेल प्रतिभा ,न दम –  खम,  न राष्ट्रीय सम्मान।  और फिर लड़की तौबा। हमें थोड़ी फुरसत मिले तो हम सोचें।  पहले ही इतने काण्ड भरे पड़े हैं आस – पास।  किस – किस को सुलझाएँ डॉली सिंह की टूटी नाक , थोड़ी टेढ़ी हो भी गई तो कौन आसमान टूट जायेगा……

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