सिर्फ घाटा है,कोरा काला घाटा।

एक छोटी सी खबर किसी अखबार में पढ़ी।
उस  खबर ने सोचने को मजबूर कर दिया।
राजनीति का स्वरुप संपूर्ण विश्व में एक समान है।
और राजनीतिज्ञ या राजनेता एक ही जमात के होते है।
खबर यह थी कि France में राजनीति की Reporting (Political Reporter) करने वाली महिलाओं ने धरने पर बैठने का निश्चय करा।
आखिर ऐसा क्या हो गया ?

\"french-journalists-sexism-petition2.si\"

वे अपने संपादकों  को नहीं ,  साथी पत्रकार भी नहीं परन्तु राजनेताओं के बेहूदे व्यव्हार से परेशान थी।
बेहद स्तरहीन टिप्पणी करने के फ्रांस के ये  राजनेता इन महिला Reporter की परेशानी का सबब थे।
किसी ने एक महिला के बालों में हाथ फेरा तो  ,

किसी ने आँख मारी ,

किसी ने flying kiss दे दी  तो ,

किसी ने कंधे पर हाथ रखकर नीचे तक सरका दिया।

किसी ने तो एक महिला पत्रकार की figure पर टिप्पणी करी तो  ,

हद तब हो गई कि एक ने तो यह तक कह डाला कि महिला पत्रकार जिनके वक्ष सुडौल हों ,उनसे चर्चा करने में आनंद आता है।

यह फ्रांस के राजनेता है!!!!!!!!!!!
हमें   आज तक लगता था | कि सिर्फ हिन्दुस्तान में यह आम बात है । हम सिर्फ़ हमारे नेताओं का ही विश्लेषण करते रह जाते थे !

पर यह कहना अतिश्योक्ति न  होगी कि सत्ता के गलियारों में इस प्रथा का प्रचलन आम है।
हमाम में सभी नंगे है।
जो नहीं है वे अछूत है।
कभी सत्ता हथियाने के लिए , पद के लिए  , खबरों में बने रहने लिए लगातार छपास के लिए   , Easy Soft Target  के लिए  , कभी विरोधी की खबर निकालने के लिए  , कभी अपने प्रचार को पैना करने के लिए   ,  यह गलबहियों का रिश्ता चलता आया है , और शायद चलता रहेगा |
Ruthless Progress का एक अहम् हिस्सा है यह  Honey Trap भी  हो सकता है। परन्तु  Compromise   करके ही  Progress  मिलता है का जुमला सुनते -सुनते  कान पाक गए है। कौन exploit कर रहा है यह कह पाना मुश्किल है।
यह इन में से किसके लिए फायदे का सौदा है , सोचना पड़ेगा।
सिर्फ घाटा है,कोरा काला घाटा।

सम्बंधों की संवेदना ही खत्म हो गयी है |
लक्ष्मण रेखा सिर्फ कथा कहानी मैं सीता माता रखें वही बेहतर है …..सिर्फ भाषण और उदहारण के लिए ।

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