गोपालदास नीरज….कविता भी होगी पर नीरज न होंगे ।
गोपालदास नीरज…. मूर्धन्य कवि के जाने से हिंदी कविता के महान युग का अंत हुआ है । अब न वैसे कवि रहे , न वैसे हिंदी और उर्दू को खूबसूरती से शब्दों में पिरोने वाले कवि रहे ,और ना ही वैसे ज़िंदादिल इंसान रहे । मुझे याद आ गए वो दिन जब पिताजी के बरामदे […]
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