दुनिया भर में मजहब के नाम पर व्यापार।

यह  जो  दुनिया  भर में मजहब  के नाम पर चल रही  है वह  सिर्फ  व्यापार  है।  घटिया  व्यापार।  डर  का व्यापार। पैसे का व्यापार। रसूख का व्यापार।

मैं  तो  सब  से यह पूछना  चाहती हुँ कि  कौन  सी  फैक्ट्रिया  है जो इन मजहब  के  व्यापारियों  को असला  देती जा रही है ? कहाँ से  आता  है  इन  के  पास  इतना बारूद।  कहाँ  से  आ  रहें  हैं , आधुनिक  हथियार।  बन्दुके   रॉकेट  लॉचर  ग्रीनिड  – बाजार मे  जो  नया  है  इनके  पास  वो  खिलौना  है क्यों ?

वो  कौन  से देशो  की  कौन  सी  फैक्ट्रिया  है ? क्या  पैसा  कमाना  ही  सब  कुछ  है ? उस  फेक्टरी  से निकला  असला  किसी  मासूम  का  खून  से  न  रंगा  होगा ? उस  देश  की  उस  फेक्टरी   ने  कभी  नहीं  सोचा कि  बन्दूक  की  नली  दूसरे  की  तरफ  मुडते  एक दिन  अपनी  ही  तरफ  भी  कभी  मुड़  सकती  है ? जिस दिन यह  फैक्ट्रियो  यह  असला  बारूद  हथियार बनाना  और बेचना  बंद  कर देंगे।  यह  आतंक  का व्यापार  वही  बंद ही  नहीं , खत्म  हो जायेगा ? है किसी  देश  मे इतना  दम ? क्या  संयुक्त  राष्ट्र  को इतना  कठोर  कदम  कभी  उठाने  के लिए खड़े  नहीं होना  चाहिए ? आतंकवाद   पर गहरी  चिन्ता  और  लम्बे  भाषण  देने  से  यह  दानव  कभी  समाप्त  नहीं  होगा  बल्कि  वैशिक  कमजोरियों  खत्म  कूटनीति  और  दुर्भाग्यपूर्ण नतीजों  के करण  ही आज  यह  समस्या  सिर्फ  कुछ  देशो  से निकलकर  विश्व  भर  मे  फैल  रही  है।

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