अपना रास्ता स्वयं ही चुनना होगा |
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कुछ दिनों पहले मुझे एक कार्यक्रम में वक्ता के रूप में आमंत्रित करा गया था । \” save the family \” . मुझे क़ुछ data भी उपलब्ध कराया गया था जो चौकाने वाला था । कार्यक्रम Press Club में आयोजित था । हॉल खचाखच भरा था । मुझे लगा कितना सुन्दर आयोजन है कि इतनी बड़ी
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मिशन सुप्रभात आयोजक ( म. प्र.) पुलिस अधीक्षक,महिला अपराध जिला इंदौर ST. Loysis H.S. School
गाँधी जयंती पर सबको यकायक गाँधी जी की याद आ जाएगी । गाँधी प्रासंगिक हो जाएंगे । गाँधी की मूर्ती सजेगी , माला चढ़ेगी , चर्खा कतेगा और प्रिय भजन गाये जाएंगे । गाँधी वापस जिंदा हो जाएंगे । क्या वाकई गाँधी हमारे बीच है , या महज एक दुकान बनकर रह गए है। कौन
आज गाँधी याद आया…….. ! Read More »
यह जो दुनिया भर में मजहब के नाम पर चल रही है वह सिर्फ व्यापार है। घटिया व्यापार। डर का व्यापार। पैसे का व्यापार। रसूख का व्यापार। मैं तो सब से यह पूछना चाहती हुँ कि कौन सी फैक्ट्रिया है जो इन मजहब के व्यापारियों को असला देती जा रही है ? कहाँ से आता
दुनिया भर में मजहब के नाम पर व्यापार। Read More »
राजनीति, नेतृत्व और साधना (21 Aug 2015) वर्तमान दौर में \’राजनीति\’ शब्द बहुत कॉमन-सा हो गया है । चाय-पान की दुकानों से लेकर ससंद के गलियारों तक में चर्चाएं राजनीति पर अक्सर होती रहती है । चाय की चुस्कियों से राजनीति पर शुरुआत करने वाले लोग हर चीज में राजनीति तलाशते रहते हैं, जबकि ऐसा
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डॉ. कलाम और डॉ. नागपाल (30 जुलाई 2015 ) ये कौम ही और थी । नस्ल ही कुछ और किस मिट्टी के बने थे ये लोग ??? जो नहीं जानते वो सोचेंगे कि यह क्या Comparison हुआ ? कहाँ डॉ. कलाम और डॉ. नागपाल ? लेकिन जितना सोच रही हुँ , उतनी ही समानता नजर आ
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एक छोटी सी खबर किसी अखबार में पढ़ी। उस खबर ने सोचने को मजबूर कर दिया। राजनीति का स्वरुप संपूर्ण विश्व में एक समान है। और राजनीतिज्ञ या राजनेता एक ही जमात के होते है। खबर यह थी कि France में राजनीति की Reporting (Political Reporter) करने वाली महिलाओं ने धरने पर बैठने का निश्चय
सिर्फ घाटा है,कोरा काला घाटा। Read More »