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ललितमोदी ने सारा मीडिया चुंबक की तरह अपनी ओर खींच लिया

ललितमोदी ने सारा मीडिया चुंबक की तरह अपनी ओर खींच लिया है ! बेचारे अरनब गोस्वामी  का चीख – चीख कर गला बैठने को आ रहा है, कभी डिग्री काण्ड , कभी ललित काण्ड, कभी पंकजा काण्ड , पर इतने सब में  घुन की तरह पीस जाती हैं , वो छोटी खबरें जिनकी और भी ध्यान […]

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कुछ दिनों पहले मुझे एक कार्यक्रम में वक्ता के रूप में आमंत्रित करा गया था।

  कुछ दिनों पहले मुझे एक कार्यक्रम में वक्ता के रूप में आमंत्रित करा गया था । \” save the  family \” .   मुझे  क़ुछ data  भी उपलब्ध कराया गया था जो चौकाने वाला था । कार्यक्रम Press  Club  में आयोजित था । हॉल खचाखच भरा था । मुझे लगा कितना सुन्दर आयोजन है कि इतनी बड़ी

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आज गाँधी याद आया…….. !

गाँधी  जयंती पर सबको यकायक गाँधी जी की याद आ जाएगी  । गाँधी  प्रासंगिक हो जाएंगे । गाँधी  की मूर्ती  सजेगी , माला चढ़ेगी , चर्खा  कतेगा और प्रिय भजन गाये  जाएंगे । गाँधी  वापस जिंदा  हो जाएंगे । क्या वाकई गाँधी  हमारे बीच है , या महज एक दुकान बनकर रह गए  है।  कौन 

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दुनिया भर में मजहब के नाम पर व्यापार।

यह  जो  दुनिया  भर में मजहब  के नाम पर चल रही  है वह  सिर्फ  व्यापार  है।  घटिया  व्यापार।  डर  का व्यापार। पैसे का व्यापार। रसूख का व्यापार। मैं  तो  सब  से यह पूछना  चाहती हुँ कि  कौन  सी  फैक्ट्रिया  है जो इन मजहब  के  व्यापारियों  को असला  देती जा रही है ? कहाँ से  आता 

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राजनीति, नेतृत्व और साधना

राजनीति, नेतृत्व और साधना (21 Aug 2015) वर्तमान दौर में \’राजनीति\’ शब्द बहुत कॉमन-सा हो गया है । चाय-पान की दुकानों से लेकर ससंद के गलियारों तक में चर्चाएं राजनीति पर अक्सर होती रहती है । चाय की चुस्कियों से राजनीति पर शुरुआत करने वाले लोग हर चीज में राजनीति तलाशते रहते हैं, जबकि ऐसा

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डॉ. कलाम और डॉ. नागपाल

 डॉ. कलाम  और  डॉ. नागपाल (30 जुलाई 2015 ) ये  कौम  ही और  थी  ।  नस्ल  ही कुछ और किस मिट्टी  के  बने थे  ये लोग ??? जो नहीं  जानते  वो सोचेंगे  कि  यह  क्या Comparison  हुआ ?  कहाँ  डॉ. कलाम  और  डॉ. नागपाल ? लेकिन जितना सोच रही हुँ , उतनी  ही समानता  नजर आ

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सिर्फ घाटा है,कोरा काला घाटा।

एक छोटी सी खबर किसी अखबार में पढ़ी। उस  खबर ने सोचने को मजबूर कर दिया। राजनीति का स्वरुप संपूर्ण विश्व में एक समान है। और राजनीतिज्ञ या राजनेता एक ही जमात के होते है। खबर यह थी कि France में राजनीति की Reporting (Political Reporter) करने वाली महिलाओं ने धरने पर बैठने का निश्चय

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कुछ याद आ रहा है न ? पीपली लाईव !

पीपली लाईव . कुछ याद आ रहा है न ? पीपली लाईव ! वहाँ नाथा था , यहाँ गजेन्द्र है ! पीपली लाईव !!! कुछ याद आ रहा है न ? पीपली लाईव ! वहाँ नाथा था , यहाँ गजेन्द्र है ! नाथा को उकसाया जाता है कि वो आत्महत्या कर ले, यहाँ  गजेन्द्र को

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भगवान केदारनाथ की जय हो !

राहुल गाँधी केदारनाथ बाबा के शरण में चले गए ! जय हो हिन्दू सनातन  धर्म की ! नहीं जनाब हिन्दू धर्म की नहीं बल्कि वोटों की जय हो ! फिर कोंग्रेस का एक नया पैंतरा ! किसान रैली के बाद केदारनाथ यात्रा ! कट्टर ईसाई जिसके Passport पर जो आजतक Raul नाम है , आज

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युवराज की जय हो !

राहुल गाँधी वापस आए. समूचा देश टकटकी लगाए  बैठा था ! राहुल गांधी वापस आ रहे  हैं ! मानो चक्रवर्ती राजा अश्वमेध यज्ञ करके लौट रहें हों  ! हम  स्वागातुर , हाथ में थाली  लिए , आरती , टीका करने के लिए  तत्पर थे ! युवराज की वापसी प्रजा के लिए कितने  उत्साह की  बात

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